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अप्रैल, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

#डायन

जब से पडोस में आयी .....एक एक कर सबकों निगले जा रही है डायन .....!!!! उसकी चमकती आँखों में एक अजीब से प्यास दिखती थी बाल लम्बे ...डायन की शक्ति उसकी चुटिया में होती है किसी तरह इसकी चुटिया कट जाये तो यह किसी का कुछ नही बिगाड पायेगी | "अरी सुनती हो....! बगल के मकान में बिरजू रहता था | अकेला था सुबह मरा पडा मिला , क्यों ?? कैसे बहन जी , हट्टा कट्टा था वो तो कैसे मर गया अभी तो बेचारे का ब्याह भी न हुआ था...... काकी , यहां डायन जो आ गयी है! अब देखते रहों कौन कौन मरता है !" "मेरी मु्र्गियां थी बारह... बची दस दो कहां गयी...दिनकर बडबडा रहा था ...रामू तूने मेरी मू्र्गी तो नही चुरायी मै क्यूं चुराऊंगा तेरी मू्र्गी, ‎ जा कही ओर जा के देख पागल कही का |" " ‎दिनकर भैया ...जल्दी आओ" .. जा मुझे परेशान न कर रामू मै तो पागल हूं , अब काहे मुझे बुला रहा है एक तो दो मुर्गी न जाने किसने चुरा ली मालिक मेरी पगार से पैसे काट लेगा और तो मुझे पागल कहता है नही भैया वो अाप मुझे समझ रहे थे , मुर्गी चोर ! तो मैने कहा बाकि मुझे पता है आपकी मुर्गी किसने चोरी किसने जल्दी बता भ...

दोस्ती और प्यार

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हेल्लो कहाँ था तू आज? तेरे फोन का इंतजार कर रही थी मैं, तूने आज कोई मैसेज भी नहीं किया. तुझे याद है ना आज वैलेंटाइन डे है. और भी तूने मैसेज नही किया. हाँ मुझे याद है.पर एक दिन मिलने से या मैसेज करने से प्यार ना घटता है और ना बढ़ाता है. पर दोस्ती जरूर रहती है . प्यार में बहुत कुछ छोटी छोटी बातें अपने यादों में रखना पड़ता है.अब जैसे तू बता पिछली बार हमलोग कब मिले थे? सोचना पड़ गया ना??? अच्छा एक बात बता आज तेरा कॉलेज कैसा रहा ?? वो पूछी ये कैसा सवाल है? और फिर वो कही अच्छा रहा. मेरे को डेविड ने भी वैलेंटाइन का मैसेज किया, बहुत अच्छा लगा. और कह क्रर हल्की दबी आवाज मे हँसने लगी. फिर उसने पूछा ...अरे हाँ डेविड कैसा है? बिना एक पल गवाये वो बोली अरे उससे तीन दिन पहले बात हुयी है. मैं उसका बेसब्री से इंतजार कर रही हूँ वो जून में आनेवाला है. अच्छा एक बात बोलूं क्या?? पिछली बार हमलोग ९ फ़रवरी चॉकलेट डे पर मिले थे. मैंने सोचा था की कुच्छ वक़्त साथ बितायेंगे. पर,तुझे ये भी याद नहीं हमेशा मैंने तुझे कॉल कर के पूछा है - अगले सप्ताह क्या कर रही हो? अगर व्यस्थ नही हो तो कही घूमने चलते है. और तुम्हारा जवा...

एक रात की मेहमान

जेठ की दुपहरी थी बाहर ऐसी तेज और चमकदार धूप थी मानों अंगारे बरस रहे हों ऐसे में यदि बाहर निकल जाएँ तो ऐसा लगता मानो किसी ने शरीर पर जलते अंगारे रख दिए, घर के भीतर भी उबाल देने वाली गर्मी थी, अम्मा, दादी, छोटी दादी और मंझली काकी सब हमारे ही बरामदे और गैलरी में बैठे थे क्योंकि गैलरी दोनों ओर से खुली होने के कारण अगर पत्ता भी हिलता तो गैलरी में हवा आती थी, बाबूजी और छोटे काका बरामदे से उतरकर जो आम का छोटा सा पेड़ था उसी की छाँव में चारपाई पर बैठे बतिया रहे थे। मैं और मेरे तीनों छोटे भाई अम्मा के डर से सोने की कोशिश कर रहे थे, कितनी भी गर्मी हो हम तो खेल-खेल में सब भूल जाते थे पर घर के बड़े हम बच्चों की भावनाओं को समझे बिना ही जबरदस्ती 'लू लग जाएगी' कहकर सुला देते, कितना कहा था अम्मा से कि धूप में नहीं खेलेंगे, काका की घारी में खेल लेंगे पर वो भला कहाँ मानने वाली थीं, डाँट-डपट कर सुला दिया। बीच-बीच में भाई कोहनी मारता अम्मा सो गईं? "चुप, वो बैठी हैं।" कहकर मैं आँखें मूंदकर सोने का उपक्रम करती। तभी बाहर से बातों की आवाजें पहले की अपेक्षा कुछ तेज हो गईं, बाबूजी की आवाज़ आ रही ...

एक रोटी ....पाँच रुपये की !

एक रिक्शेवान अपने किसी सरकारी काम से , उस सरकारी दफ्तर गया ... जिसके मंजिलों , सीढियों से वो भालीभाती परिचित हो चूका था ... परिचित इसलिए .. अरे भाई ! कोई सात – आठ बार वहां जायेगा .. तो अपने आप दोस्ती और परिचय हो जाता है ... और कभी – कभी तो ....खैर ! तीसरी मंजिल कमरा न . ३१३ भू – अभियन्तक ये तीन पंक्तियाँ उसके दिमाग में कौधने लगती थी .. जब भी वो उस लाल रंग के चार मंजिली दफ्तर के गेट से दाखिला लेता था । उसने अपने फाम को कस के अपनी हथेली मे पकड़ा.... और चल पड़ा अपनी मंज़िल की ओर ! उसे आज न जाने क्यूँ... उस बदरी के मौसम मे एक उम्मीद की किरण नज़र आने लगी थी...पर इंद्र देवता आज बरसने को आतुर थे । आज बारिश होय से पहले आपन कमवा होइए जाए के चाही... ऐसा सीढ़ियों पर चड्ते हुये उसने सोचा । जैसे ही वो उस भू – अभियंतक के कमरे मे दाखिल हुआ .... वो चौंक गया ! सभी साहब लोग अपने काम मे मशगूल थे ... मानो आज उनका 2 घंटे बाद इंतिहान हो ! फिलहाल वो अपने माथो के रेखाओ को थोड़ा आराम देते हुये ... शर्मा जी के डेस्क के नजदीक पहुचा । “ प्रणाम साहेब “... अपनी उम्र को चुनौती देते हुये उसने शर्मा जी से ...

Bachpan ki yaade Rahul Kumar Gupta Reotipur

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सच्चा "इंसान" सादे "कपड़ो" में भी चमकता है.... ओर झूठा "इंसान" "सूट बूट" में भी फीका होता है ।।

रेवतीपुर के पट्टी बहोरीकराय में सत्यमिली के पास एक्सीडेंट हो गया है यह लोग कामाख्या धाम से दर्शन करके वापस आ रहे थे यह लोग रेवतीपुर के ही है जिन का इलाज हुआ निजी हॉस्पिटल में तीन लोग सुरक्षित है एक हालत सीरियस है जो कि यहां से जवाब देने पर उसे गाजीपुर ले जाया गया

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रेवतीपुर के पट्टी बहोरीकराय में सत्यमिली के पास एक्सीडेंट हो गया है यह लोग कामाख्या धाम से दर्शन करके वापस आ रहे थे यह लोग रेवतीपुर के ही है जिन का इलाज हुआ निजी हॉस्पिटल में तीन लोग सुरक्षित है एक हालत सीरियस है जो कि यहां से जवाब देने पर उसे गाजीपुर ले जाया गया

चोर और राजा

किसी जमाने में एक चोर था। वह बडा ही चतुर था। लोगों का कहना था कि वह आदमी की आंखों का काजल तक उडा सकता था। एक दिन उस चोर ने सोचा कि जबतक वह राजधानी में नहीं जायगा और अपना करतब नहीं दिखायगी, तबतक चोरों के बीच उसकी धाक नहीं जमेगी। यह सोचकर वह राजधानी की ओर रवाना हुआ और वहां पहुंचकर उसने यह देखने के लिए नगर का चक्कर लगाया कि कहां कया कर सकता है। उसने तय कि कि राजा के महल से अपना काम शुरू करेगा। राजा ने रातदिन महल की रखवाली के लिए बहुतसे सिपाही तैनात कर रखे थे। बिना पकडे गये परिन्दा भी महल में नहीं घुस सकता था। महल में एक बहुत बडी घडीं लगी थी, जो दिन रात का समय बताने के लिए घंटे बजाती रहती थी। चोर ने लोहे की कुछ कीलें इकठटी कीं ओर जब रात को घडी ने बारह बजाये तो घंटे की हर आवाज के साथ वह महल की दीवार में एकएक कील ठोकता गया। इसतरह बिना शोर किये उसने दीवार में बारह कीलें लगा दीं, फिर उन्हें पकड पकडकर वह ऊपर चढ गया और महल में दाखिल हो गया। इसके बाद वह खजाने में गया और वहां से बहुत से हीरे चुरा लाया। अगले दिन जब चोरी का पता लगा तो मंत्रियों ने राजा को इसकी खबर दी। राजा बडा हैरान और नाराज हुआ।...

बेटी होना अभिशाप ?

जीवन का वृतांत करना असंभव सा है ! उदेश्य क्या है? वो न मुझे मालुम है न क़िसी और को,जंहा तक मुझे मालुम है,लोग फालतु का ज्ञान बाट कर खुद को परमयोगी सिध्द करनें मे लगें हुए है मांजरा था कल का,तेज चिलचिलाती धुप,चहरे पर पसीनें की बुँदे,मैं अपने कार्य के सिलसिले मे मुझे जैसलमेर जाना था, महीनें मे दो बार जाना होता था,रास्ते मे राजस्थान के लोक देवता बाबा राम देव जी की समाधि पडती थी तो सोचा दर्शंन करके ही आगे निकल लु , थोडा काम भी था ! बस से पोकरण उतर कर चार पहिया वाहन से मे राम देव जी की समाधि पर पहुचां , गर्मी के चलते सर्ट पसीने से तर बतर हो रहा था ,जल्दी से वापस मुझे जैसलमेर के लिए मुझे गाडी पकडनी थी , मंदिर से बाहर कुछ ही दुरी पर एक गाड़ी लगी हुई थी जिप्सी उसमे बीच वाले भाग मे बैठ गया जो ड्राईवर एक पीछे थी कुछ ही देर मे मेरे बगल मे एक लडकी आकर बैठी जिसके हाथ मे एक नन्ही संतान थी ,साथ मे उस लडकी की मां भी थी मललब नन्हें शिशु की नानी ! शायद संतान के जन्म के बाद अपनी माँ से विदा ले रहीं थीं इस धूप मे पसीनें की बुंदों से ज्यादा उस बेटि कि आँखों के आँसु थे, राजस्थान मे स्त्रीयां प्रसव के पश्चात क...

पहली मुलाकात

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"जी क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ.." उसने पलटकर देखा और बिना कुछ कहे गर्दन खिड़की की ओर घुमा ली.. अनिल बैठ गया...अब लड़की की खामोशी का मतलब हाँ ही तो होता है... "खीरा ले लो...दो का तीन..खीरा..." "ओ खीरे वाले तीन खीरे दे दे भाई..बड़ी गर्मी है यार.." खिडकी से बाहर की ओर वो खीरे वाला खीरा बेच रहा था.. "मैडम थोड़ा ई खीरा बढ़ा दीजिए.." उसने खीरा रिसीव कर..अनिल को पकड़ा दिया... "ये पैसे भी जरा.." दस का नोट खीरे वाले को दिए..उसने छुट्टे वापस किये...उसकी आँखों से साफ़ झलक रहा था यूँ संदेशवाहक होना उसे पसंद नहीं आ रहा...फिर भी उसने छुट्टे अनिल को दिए.. "आप खीरे खाएंगी..?.." उसने देखा भी नहीं... "एक लीजिए.." "आप शांति के साथ नहीं बैठ सकते क्या..." इस दो टूक जवाब से उसने उसके मुँह पर ताला लगा दिया.. खीरा ख़त्म किया..अब वापस कागज़ फेंकने की बारी थी..इधर उधर देख रहा था..पर अनिल की हिम्मत नहीं थी की वो अंजली से कहे..पिछला जवाब उसे बखूबी याद था... अंजली ने उसकी ओर देखा..एक लंबी साँस ले अपना हाथ बढ़ा दिया..उसने एक स्माइल के सा...

mahakal

मत खोज मुझे पत्थरो में , ये दुनिया इक जंजाल है ,, बंद आंखे खोल दे ऐ इन्सान , तेरे भीतर ही बसा महाकाल है!! 💓💓🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🚩🔱🔱महाकाल 🔱🔱🚩 🕉📿|| हर हर महादेव ||📿🕉

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15 साल का एक लड़का रेलवे स्टेशन पर पानी बेचकर अपना गुजारा करता था। एक दिन जब वह पानी बेच रहा था तो ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे बुलाया। लड़का सेठ के पास पहुंचा तो सेठ ने उससे पूछा कि पानी की बोतल कितने रुपए की है? लड़के ने कहा- 10 रूपए की। सेठ ने उससे कहा कि 7 रूपए में देगा क्या? सेठ की बात सुनकर लड़का मुस्कुराकर उनके हाथ से पानी की बोतल लेकर आगे चला गया। सेठ के पास बैठा एक संत यह सब देख रहा था। वह यही सोच रहा था कि आखिर लड़का मुस्कुराया क्यों? इसके पीछे जरूर कोई रहस्य है। इसके बाद महात्मा ट्रेन से उतरकर उस लड़के के पीछे गए और फिर लड़के के पास जाकर पूछा कि सेठ ने जब मोल-भाव किया तो तुम क्यों मुस्कुरा रहे थे? तब लड़का बोला कि महाराज में इस वजह से हंस रहा था, क्योंकि सेठ जी को प्यास नहीं लगी थी। वह तो केवल बोतल का रेट पूछ रहे थे। फिर महात्मा ने उससे कहा- तुम्हें कैसे पता कि सेठ जी को प्यास लगी ही नहीं थी? तो लड़के ने जवाब दिया कि जिसको वाकई में प्यास लगी होती है, वह सबसे पहले बोतल लेकर पानी पीता है। उसके बाद पानी का रेट पूछता है? पहले कीमत पूछने का अर्थ है कि प्यास लगी ही नहीं है। सं...

Rahul Kumar Gupta Reotipur

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