दोस्ती और प्यार

हेल्लो कहाँ था तू आज? तेरे फोन का इंतजार कर रही थी मैं, तूने आज कोई मैसेज भी नहीं किया. तुझे याद है ना आज वैलेंटाइन डे है. और भी तूने मैसेज नही किया. हाँ मुझे याद है.पर एक दिन मिलने से या मैसेज करने से प्यार ना घटता है और ना बढ़ाता है. पर दोस्ती जरूर रहती है . प्यार में बहुत कुछ छोटी छोटी बातें अपने यादों में रखना पड़ता है.अब जैसे तू बता पिछली बार हमलोग कब मिले थे? सोचना पड़ गया ना??? अच्छा एक बात बता आज तेरा कॉलेज कैसा रहा ?? वो पूछी ये कैसा सवाल है? और फिर वो कही अच्छा रहा. मेरे को डेविड ने भी वैलेंटाइन का मैसेज किया, बहुत अच्छा लगा. और कह क्रर हल्की दबी आवाज मे हँसने लगी. फिर उसने पूछा ...अरे हाँ डेविड कैसा है? बिना एक पल गवाये वो बोली अरे उससे तीन दिन पहले बात हुयी है. मैं उसका बेसब्री से इंतजार कर रही हूँ वो जून में आनेवाला है. अच्छा एक बात बोलूं क्या?? पिछली बार हमलोग ९ फ़रवरी चॉकलेट डे पर मिले थे. मैंने सोचा था की कुच्छ वक़्त साथ बितायेंगे. पर,तुझे ये भी याद नहीं हमेशा मैंने तुझे कॉल कर के पूछा है - अगले सप्ताह क्या कर रही हो? अगर व्यस्थ नही हो तो कही घूमने चलते है. और तुम्हारा जवाब सोचती हूँ , देखती हूँ.फिर मैं दो दिन बाद कॉल करके पूछता हूँ ...तुम्हारा जवाब क्या है? और इस बार भी तुमने नहीं कहा. और फिर दो दिन बाद तुम अपने दोस्तों के साथ घूमने जाती हो. सच कह रहा हूँ. तुम्हे अपने दोस्तों के साथ घूमना था और ये बात तुम नहीं कह रही थी . इस बात का ख़राब लगा मुझे. हाँ, पर एक बात कहना चाहता हूँ जो तुम मेरे लिए लंच लाती थी उसे कभी नहीं भूलूंगा और उस पल को भी जब हमलोग अकेले ऑफिस कैंटीन बात करते हुए समय बिताते थे. यकींन करो ये सबसे हसीं और यादगार पल था और रहेगा. तुम हमेशा कहती हो डेविड तुमको अच्छा से समझता हैं , बिना तुम्हारे कुछ कहै वो सब कुछ समझ जाता हैं . शायद तुमको लगता होगा मैं उससे जलता होगा, पर ऐसा कुछ नहीं हैं . जब तुम दोनों का झगड़ा हुआ था तो मैंने ही तुम्हें डेविड से बात करने को कहा था. यहाँ तक की बिन्नी या और दूसरे दोस्तों से बात करने को कहता था. मैंने तुम्हें हमेशा कहा है, मैं तुम पर किसी बात का दवाब नहीं डाल नही सकता हूँ. मेरे नजर में प्यार स्नेह के साथ एक- दूसरे के भावनाओ को समझते हुए किया जा सकता हैं. मैंने हमेशा कोशिश करता हूँ कि लोगों के यादों में रहूँ. देखों हमारे बीच प्यार रहे या ना रहे पर दोस्ती जरूर रहनी चाहिए. यह जरुरी नहीं है -आप जो चाहों वो हमेशा मिल जाये. प्यार में जान लेने या देने की बात नहीं होती, ख़ुशी की बात होती हैं. हम जिससे प्यार करते हैं उसकी ख़ुशी ज्यादा जरुरी हैं. उसकी ख़ुशी में अपनी ख़ुशी खोजनी पड़ती हैं और खुश रहना होता हैं . और ये आंसू भी ख़ुशी के आंसू होने चाहिए. हम कभी कभी दोस्ती को प्यार के दूरबीन से देखते हैं इसलिए दोस्ती में नादानियाँ हो जाती हैं . हेल्लो..... हेल्लो....क्या हुआ? कुछ बोलो ... मेरे लिए तू आखरी लड़की है जिससे में प्यार करता हूँ और करता रहूँगा. चाहे तू जो समझे . क्योंकि प्यार ख़ुशी का दूसरा पहलूँ हैं ....अगर तू खुश हैं ऐसी जिंदगी से तो मैँ भी क्योंकि तेरी ख़ुशी में मेरी ख़ुशी हैं

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