एक मासूम भूतिया कहानी

हाँलाकी मैँ रवि और रिया का सौतेला बङा भाई था, लेकीन मुझे उनसे सगे भाई से भी ज्यादा स्नेह था.... वो अपने जन्म के बाद मेरे कमरे मेँ नहीँ आये कभी, क्योँकी मेरी सौतेली माँ ने उन्हेँ मेरे कमरे मेँ आने से मना किया था। लेकीन आज.... आज मेरी सौतेली माँ बाहर गयी हुई थी, इसलिये रवि और रिया मेरे कमरे मेँ आकर मेरे बेड पर बैठ गये.... मैँने उन्हेँ हैलो कहा, लेकीन वो मुझे कोई जवाब ना देकर मेरे कमरे को निहारते रहे बङी उत्सुकता से। मैँ सोफे पर बैठ गया। थोङी देर बाद रवि और रिया मेरे बेड पर बैठ गये और एक कामिक्स हाथ मेँ लेकर बातचीत करने लगे। "इस कमरे मेँ कितनी अच्छी खुशबू आ रही है..." -रिया ने कहा। रवि ने जवाब दिया- "एक दम मोगरे जैसी... " मैँ अपने कमरे की प्रंशसा सुनकर उनकी तरफ देखकर मुस्करा दिया। वो काफ़ी देर तक इधर उधर की बातेँ करने लगे, फिर काफी देर बाद बात भूतोँ पर आ गई और वो भूतोँ के बारे मेँ बाते करने लगे। मैँ मगन होकर उनकी बातेँ सुनने लगा। रवि कहने लगा-"पता है तुम्हेँ रिया, भूत हमारे आसपास होते है लेकीन हम उन्हेँ महसूस नहीँ कर पाते। वो हरवक्त हमारेँ चारौँ तरफ़ मौजूद रहते है।" रिया ने कहा- "तो क्या हर वक्त वो हमारे पास होते है? क्या हम लोँगो के आसपास भी कोई भूत मौजूद है?" "हाँ, बिल्कुल साये की तरह...." रवि ने कहा... " वो हमारे पास हमेँ घूरते रहते है... क्या पता तुम्हारे पीछे हो! जब भूत पास मेँ होते हैँ ना तो वातावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है और पसीना अत्यधिक बढ़ जाता है। घङी की गति असामान्य हो जाती है और घङी का कांटा एक नियत वक्त पर आकर रुक जाता है। दिवार पर किसी के चलने की आवाज आती है या दिवारोँ पर खरोँचो के निशान दिखाई देने लगते है। एक विचित्र तरह की गंध आने लगती है, अच्छी आत्माऔँ से खुशबू और बुरी आत्माऔँ से बदबू... ऐसा लगता है जैसे हमारे पास कोई बैठा हो और हमेँ छुने की कोशिश कर रहा हो। वस्तुयेँ अपने नियत स्थान से गायब दुसरे स्थान पर मिलती है।" रवि सुनाता जा रहा था और मैँ और रिया चुपचाप सुनते जा रहे थे। रवि की पकङ उसके हाथ मेँ रखी कामिक्स पर धीमी पङ चुकी थी इसलिये मैँने उठकर कामिक्स धीरे से सरका कर डेस्क कि दराज मेँ रख ली और वापस आकर बैठ गया। रवि ने कहना जारी रखा..."आत्मायेँ हमसे बात करने की कोशिश करती है। अगर कोई साया महसूस हो पास मेँ, तो इसका मतलब हैँ की आत्मा पास मेँ है। बिजली के बल्ब चालू और बँद होने लगते है...." रवि पसीने से भीगा हुआ था। कमरे का तापमान बढ़ गया था। रवि अपनी बात पूरी नहीँ कर पाया की रिया चीखी...... "रविईईईई..." रवि भी एकदम झटके मेँ आ गया। कमरे का बल्ब कबसे चालू और बँद हो रहा था। घङी का काँटा 12 बजे पर आकर रुक गया था। छत पर पैरोँ के निशान थे। ये सब बातेँ अचानक ही उन्होँने नोट की। तभी रिया चीखी..."तुमने जो कामिक्स गोद मेँ रखी थी वो दराज मेँ कैसे आई?" "अरे डरो मत... वो कामिक्स मैनेँ रखी थी दराज मेँ... " मैनेँ कहना चाहा , पर डर के कारण किसी ने मेरी आवाज नहीँ सुनी। तभी रवि चीखा..."रिया तुम्हारेँ पीछे दिवार पर छाया किसकी है?" ऐसा कहकर वो उठा और मेरे रुम से बाहर भागा, उसी के साथ रिया भी बाहर भाग गयी। "अरे...वो छाया मेरी हैँ...." मैनेँ उनके पीछे पुकारते हुये कहा, लेकीन वो पहले ही बाहर भाग गये।मैँ कमरे मेँ ही रह गया। थोङी देर बाद मेरी सौतेली माँ मेरे कमरे मेँ एक खंजर लेकर आई। "खबरदार जो मेरे बच्चोँ की तरफ आँख उठाकर भी देखा....दोबारा मार दूँगी..." ऐसा कहकर वो दरवाजा बंद कर चली गयी। मैँ डर कर फर्श के नीचे दब्बी हुई अपनी लाश मेँ आकर सो गया। म्मममैँ बुरा नहीँ हूँ... अच्छा हूँ.... सच्ची.... । बस सौतेली माँ के उस खंजर से डरता हुँ ,जिस खंजर से उसने कुछ साल पहले मुझे मारकर मेरे कमरे के फर्श के नीचे दफ़न कर दिया था। हाँ, मैँ अच्छा भूत हुँ क्योँकी मेरे कमरे मेँ आज भी मोगरे की खुशबू आती हैँ जो अच्छी आत्मा का सबूत है.....

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