दहेज़
मिताली बेटा जिंदगी किसी एक पर नही रूकती | गलती किससे नही होती पर उनसे सिख कर आगे बढ़ वाला ही समझदार कहलाता है "
"जी पापा " इतना कहकर मिताली अपने कमरे में चली गयी |
३ साल पहले
अरविन्द तुम मेरी ताकत और कमजोरी दोनॊ हो | कभी जीवन के सफर में छोड़कर जाना नही |" अरविन्द के कंधे पर सर टिकाये मिताली ने कहा
"मिताली तुम्हारे बिना मेरा अस्तित्व ही कहाँ है प्लीज ये सब बंद करो सोचना " कहकर अरविन्द ने मिताली के माथे को अपनी सांसो से नहला दिया |
मिताली और अरविन्द एक दूसरे को ५ सालों से पसंद करते है जान बसती है एक दूसरे में इनकी | मिताली पेशे से डॉक्टर है स्त्री रोग विशेषज्ञ और अरविन्द शहर के ऊँचे बिसनेसमैन के बेटा खुद के कारोबार को सम्हालता है |मिताली के घर वालो को दोनों के रिश्ते से कोई ऐतराज़ भी भी नही है उन्हें अपनी परवरिश और उसकी समझदारी दोनों पर आँख बन्द कर के भरोसा है
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अरविन्द अपने घर में भी बात करो के तक ऐसे चलेगा " मिताली ने कहा |
"अच्छा किसी दिन बात करता हूँ बाबा " हमेसा की तरह अरविन्द के रटा रटाया जवाब था
एकदिन अरविन्द ने खा " मिताली अपने पापा को हमारे घर भेज दो रिश्ता अब अगले पायदान पर पहुचँना चाहिए न "
मिताली इतनी खुश थी जैसे सरे ज़माने की खुशियां उसके आँचल में आ गयी हो
सपने जो उन अरविन्द के साथ देखे थे अब उनमे रंग भरने के वक्त आ गया था | माँ से उन पापा तक बात पहुचाई और ये तय हुआ की अगले दिन ही वो अरविन्द के परिवार से मिलने जायेंगे|
रात भर मिताली के सपने पंख लगाक आसमान में परवेज भरते रहे
अगले दिन मिताली के माँ पापा अरविन्द के घर गए | जब वापस आये तो वह के वाकया सुनकर मिताली हैरान रह गयी
अरविन्द के पापा ने कहा - देखिये अग्निहोत्री जी बच्चे एक दूसरे को पसंद करते है ठीक है पर हमे भी तो समाज देखना है | कुछ ज्यादा नही ५० लाख कैश एक 4 व्हीलर और एक फ्लैट अपनी बेटी को दे दीजियेगा |
"पर हमारी इतनी हैषियत नही है की हम इतना दे सके मिताली हमारी पढ़ी लिखी आत्मनिर्भर है उसकी पढ़ाई में हमन सब खर्च कर दिया | फिर भी हम अपने हैसियत के हिसा से करेंगे अआप थोड़ा सोच हमे भी लोन लें होगा " हाथ जोड़ते हुए खा था मिताली के पापा ने
" अब आप जमीं बेचे या खुद को इससे काम में तो भूल जाइयेगा ऐसे भी को अहसान नही कर रहे आप हमपर" कहकर अरविन्द के पापा चले गए |
मिताली ने अरविन्द को फ़ोन किया और सब बताया अब उसके टूटने बारी थी अरविन्द ने कहा " देखो यार इन सबमे ना पडो तो अच्छा है
बड़ो के बीच बोलने का कोई जरूरत नही है और मैं अपने घरवालो को नही छोडूंगा तुम्हे न पसंद हो तो कर लो कहि और सादी ये सब तो जरुरी होता है "
मिताली पर ऐसा लगा जैस आसमान टूट गया हो सारे सपने धराशायी हो चुके थे
"पापा मुझे ये शादी नही करनी कुछ नही देंग आप बस " कहकर मिताली चली गयी |
और एक बिखरे भूत को समेटने में मिताली और बिखर गयी पर फैसला नही बदला |
आज का दिन
संस्कार अपने माँ पापा के साथ आया मिताली को देखने के लिए ... पहली मुलाकात में ही मिताली ने उसे सब सच बता दिया
संस्कार अपने नाम की तरह ही निकला ...उसने शादी के लिए हाँ कर दिया
"शर्मा जी आप है कोई डिमांड है तो बता दीजिये भाई शादी में लेन देन तो होता ही है " मिताली के पाप ने कहा
"हाँ हाँ क्यों नही भाई साहब हम बिना दहे के शादी नही करने वाले हमे "दहेज़" में आपकी मिताली बेटी और उसके संस्कार चाहिए " कहकर संस्कार के पापा हाथ जोड़कर खड़े हो गए |
सबकी आँखे नम थी लेकिन उम्मीद संतोष के आँशु है उनका पूरा जीवन उनकी मिताली किसी रिश्ते के कारोबारी के यहाँ नही एक हिरे के साथ जायेगी |
"मिताली ....मिताली ....अरे कहाँ खोयी है उठ बारात आ गयी चल ना ...." मिताली है माँ ने उसे झकझोरते हुए कहा
हाँ माँ चलो न कहकर मिताली उठ खड़ी हुयी ....मिताली ....हाँ दुल्हन बनी मिताली....
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